शुक्रवार, 23 सितंबर 2011

वैदिक गणित से मौज-मस्ती के साथ गणित की पढ़ाई..........................(शिवानी जोशी गुरुवार , 13 नवम्बर 2008)

वैदिक गणित को लेकर न्यूयॉर्क टाईम्स के थॉमस फ्राईडमैन ने  कहा था-60 के दशक में जब हम अमरीकी बच्चे बड़े हो रहे थे, तो हमें यह कहा जाता था कि खाने के समय हमें खाना जूठा नहीं छोड़ना चाहिए, हम जितना खाना जूठा छोड़ते हैं उससे कई लोगों का पेट भर सकता है। मेरी माँ मुझसे कहा करती थी, जब तुम खाना खाते हो तो भारत में भूख से मरने वाले बच्चों के बारे में भी सोचो, और आज ४० साल बाद मैं अपने बच्चों से कहता हूँ कि अपना गणित का होमवर्क पूरा करो और इसके साथ ही भारत के बच्चों के बारे में सोचो, वे तुमको भूखों मरने पर मजूबर कर देंगे।
अगर भारतीय बच्चे वैदिक गणित के महत्व और उपयोगिता को समझ लें तो थॉमस फ्राईडमैन का यह वक्तव्य सही साबित हो सकता है। वैदिक गणित के माध्यम से हम गणित को रोजमर्रा की जिंदगी में मौज मस्ती की तरह शामिल कर सकते हैं।  वैदिक गणित का किसी भी धर्म से कोई लेना देन नहीं है। यह मात्र एक गणित है। अगर कोई हमसे पूछे कि १२ गुणा १२ कितना होता है तो हम इसका तत्काल जवाब देंगे १४४. लेकिन कोई अगर हमसे पूछे कि १७ गुणा १८ कितना होता है तो हमारे माथे पर बह पड़ जाएंगेऔर हम इसका गुणा करने मे उलझ जाएंगे। इसके लिए फिर लम अपने स्कूल के समय की कोई तरकीब आजमाएंगे, लेकिन इस पूरी कवायद में  बहुत समय लग जाएगा, या फिर हम इसका आसान तरीका अपनाएंगे यानि केल्कुलेटर की मदद से इसका हल खोजेंगे।
वैदिक गणित हमारी अपनी प्राचीन गणित है जिसके माध्यम से हम मात्र कुछ क्षणों में अपने कठिन से कठिन सवाल का हल पा सकते हैं, लेकिन हम किसी भी तरह की गणना के लिए पूरी तरह से कैल्कुलेटर के आदी हो गए हैं,  जो कि पश्चिम जगत की खोज है। अगर हम अतीत में जाएं, तो वह काल न तो कंप्यूटर का था न कैल्कुलैटर का, आज से सैकड़ों साल पहले के समय की जो बात हमारे दिमाग में सबसे पहले आती है वह है वैदिक काल। हमारे चार वेद हैं, और वैदिक गणित अथर्ववेद का ही एक भाग है।
ऐसा कहा जाता है कि बगदाद के राजा ने उज्जैन के एक विद्वान को अपने यहाँ विज्ञान और गणित पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया था। उस राजा ने कई भारतीय पुस्तकों का अरबी में अनुवाद भी करवाया। इसके बाद यही पध्दति ११ वीं शताब्दी में यूरोप जा पहुँची। एक इस्लामिक विद्वान अल-बरुनी भारतीय विज्ञान की शिक्षा प्राप्त करने के लिए भारत आया। भारत में वह तीस साल तक रहा और उसने कई किताबें भी लिखी, जिसमें से हिसाब-ए-हिंदी सबसे प्रसिध्द पुस्तक है।
जगद्गुरू शंकराचार्य भारती कृष्ण तीर्थ महाराज ने वर्ष १९११ से १९१८ तक वैदिक गणित पर शोध किया और इसे पुनर्स्थापित किया।
वैदिक गणित एक तरह से 16 सूत्रों पर आधारित है। इन सूत्रों को आप चाहें तो एक तकनीक या ट्रिक भी कह सकते हैं। कई लोग तो इसे जादुई ट्रिक भी कहते हैं। इस तकनीक की मदद से सवाल के साथ ही उसका जवाब भी हमारे दिमाग में आ जाता है। हम इसे दूसरे शब्दों में इस तरह कह सकते हैं वैदिक गणित वह विधा है जिसकी मदद से हम सवाल में ही छुपे जवाब का पता लगा सकते हैं।
अब जरा एक सरल से गणितीय सूत्र पर एक निगाह डालें।
उदाहरण के लिए हमें105 गुणा 107 का हल निकालना है।
तो वैदिक गणित की मदद से इसे इस तरह हल करेंगे-

105x107 = १ X(१X१) / 12 (5+7) / 35 (5X7)....11235

अगर हमें 12345 x 11 का हल निकालना है तो वैदिक गणित की मदद से इसे इस तरह हल करेंगे

12345 x 11 = 1/3 (1+2) 5 (2+3)7 (3+4) 9 (4+5)= 135795
इस तरह हम सवाल को एक निश्चित विधि से विभाजित कर उसका उत्तर उसके अंदर से ही हासिल कर सकते हैं। क्या यह जादू नहीं है
यह दुर्भाग्य की बात है कि भारत में 90 प्रतिशत लोग इस जादुई गणित से परिचित नहीं है।
वैदिक गणित के माध्यम से कोई भी विद्यार्थी गणित से संबंधित किसी भी सवाल का हल बजाय कुछ मिनटों के मात्र कुछ  क्षणों में ही हासिल कर सकता है, इससे उसका मसय भी बचेगा और परीक्षा में वह ज्यादा अंक भी हासिल कर सकता है। इस विधि के माध्यम से कोई भी विद्यार्थी जोड़, बाकी घटाव, वर्ग, वर्गमूल और घन मूल आदि सवालों को बहुत संक्षिप्त तरीके कम समय मे कर सकता है। किसी भी विद्यार्थी के लिए परीक्षा में ५ या १० अंकों का अंतर बहुत मायने रखता है खासकर उनके लिए जो कॉलेज में प्रवेश लेना चाहते हैं।
वैदिक गणित  की तुलना अगर यूसी मैथ्स से की जाए तो हम पाते हैं कि विद्यार्थी एबैकस की मदद के बिना यूसी मैथ्स नहीं सीख सकते। एबैकस वह उपकरण है जिसका आविष्कार चीन में हुआ है और इसमें कुछ बिंदुओ का प्रयोग किया जाता है। दूसरी बात इसको सीखने में ज्यादा समय (कुछ सप्ताह) लगता है। इसको विस्तार से सीखने में  यानि भाग देना, गुणा करना, आदि सीखने मे कई और सप्ताह लग जाते हैं।
जबकि वैदिक गणित में तो किसी भी विद्यार्थी को इसके बुनियादी सिध्दांतों को ही सीखना होता है और उसे गणित के सवाल के अनुसार जोड़, घटाव, गुणा भाग से लेकर वर्ग, वर्गमूल, और घनमूल निकालने में प्रयोग में लाना होता है। यह सबकुछ कोई भी एक घंटे तक चहने वाले 12 सत्रों में आसानी से सीख सकता है। वैदिक गणित बीजगणित, त्रिकोणमिति और कैल्कुलस से जुड़े सवालों को हल करने में भी उपयोगी होता है। खगोल और अंकगणित से संबंधित गणनाओं के लिए भी वैदिक गणित बेहद उपयोगी है।
वैदिक गणित की सबसे बड़ी बात यह है कि इससे पश्चिमी विधा की पध्दति की एकरसता से छुटकारा मिल जाता है। इस विधि की वजह से गणित के प्रति विद्यार्थियों की रुचि हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। इस लेख का मकसद यही है कि आपके बच्चे गणित के मामले में कैल्कुलेटर पर आश्रित ना रहें और गणित के अंकों के साथ खेलें इससे उनकी बुध्दि भी कुशाग्र होगी।
वैदिक गणित उन लोगों को और उन छात्रों को जरुर सीखना चाहिए जो गणित से घबराते हैं। परीक्षा में गणित के पेपर में समय की कमी से अपने सवालों को हल नहीं कर पाते हैं जो अन्य विषयों में तो अच्छी पढ़ाई करते हैं मगर गणित विषय में रुचि पैदा नहीं होती। जो मन ही मन में गणना करने में हमेशा पिछ़ड़ जाते हैं।
वैदिक गणित बहुत सीधा और सरल है जिससे समय की बचत होती है। इसकी मदद से जटिल गणित की गणनाएँ भी आसानी से की जा सकती है। इससे हमारी मानसिक एकाग्रता में वृध्दि होती है। आप अपने जवाब को लेकर पूरे आत्मविश्वास से भरे होते हैं।
जटिल खगोलीय गणना करने के लिए नासा (अमरीकी अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र) में भी वैदिक गणित का प्रयोग किया जाता है।
आज वैदिक गणित इंग्लैंड, आयरलैंड, हॉलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यू .जीलैंड और अमरीका सहित कई देशों में पढ़ाया जा रहा हैसाथ ही स्वीडन, जर्मनी, ईटली पौलेंड और सिंगापुर में भी इसे स्वीकार किया गया है। हमेशा याद रखें: किसी समस्या का समाधान खोजने का तरीका जितना सरल होगा,  आप उतनी ही जल्दी उसे हल कर सकेंगे और इसमें गलती होने की संभावना भी कम से कम होगी।